Transport 1:00

बच्चों के लिए ट्रेन ट्रैक का रहस्य

1शंकु का रहस्य

ट्रेनें विशाल मशीनें होती हैं जिनका वज़न एक इंजन (लोकोमोटिव) का ही 200 टन से अधिक हो सकता है! इन दिग्गजों को सुचारू रूप से चलाने के लिए, इंजीनियर ज्यामिति (Geometry) के एक चतुर तरीके का उपयोग करते हैं। सपाट सिलेंडर होने के बजाय, ट्रेन के पहिये हल्के से अंदर की ओर झुके हुए शंकु (कोन) के आकार के होते हैं। यह शंकु आकार ही ट्रेन के मुड़ने का रहस्य है। जब कोई ट्रेन मोड़ में प्रवेश करती है, तो अपकेन्द्रीय बल (Centrifugal Force) स्वाभाविक रूप से उसे पटरी के बाहरी हिस्से की ओर धकेलता है। शंकु आकार के कारण, मोड़ के बाहरी हिस्से का पहिया अपने चौड़े हिस्से (बड़े व्यास) पर टिका होता है, जबकि अंदरूनी पहिया अपने पतले हिस्से पर टिका होता है। इससे बाहरी पहिया अंदरूनी पहिये की तुलना में थोड़ी लंबी दूरी तय कर पाता है, जिससे बिना किसी रगड़ या फिसलन के ट्रेन मोड़ के चारों ओर निर्देशित हो जाती है।

2फ्लैंज के साथ सुरक्षा पहले

यदि आप ट्रेन के पहिये को ध्यान से देखेंगे, तो आपको अंदरूनी किनारे पर एक उठा हुआ, नुकीला किनारा दिखाई देगा। इसे 'फ्लैंज' कहा जाता है। जहाँ शंकु आकार ज़्यादातर मोड़ने का काम करता है, वहीं फ्लैंज एक सुपरहीरो बैकअप योजना की तरह काम करता है। यह एक सुरक्षा बाधा है जो पहिये को स्टील की पटरियों से कभी भी उतरने नहीं देती। ज़्यादातर आधुनिक ट्रेन पटरियों को 'मानक गेज' (Standard Gauge) के साथ बनाया जाता है, जिसका मतलब है कि वे ठीक 1,435 मिलीमीटर की दूरी पर होती हैं। फ्लैंज सुनिश्चित करते हैं कि पहिये इस सटीक रास्ते में लॉक रहें, भले ही ट्रेन 100 मील प्रति घंटे से ज़्यादा की गति से चल रही हो!

3स्टीयरिंग व्हील की ज़रूरत नहीं

कार या बस के विपरीत, ट्रेन चालक—जिसे अक्सर इंजीनियर कहा जाता है—के पास मोड़ने के लिए स्टीयरिंग व्हील नहीं होता है। इसके बजाय, वे गति और ब्रेक को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। असल में, पटरी ही ट्रेन के लिए 'सोचने' का काम करती है! क्योंकि पटरियों को भारी लकड़ी या कंक्रीट के 'स्लीपरों' से ज़मीन में मजबूती से लगाया जाता है, ट्रेन बस अपने सामने बिछे रास्ते का अनुसरण करती है। स्टील की पटरी और शंकु के आकार के पहिये की यह अविश्वसनीय साझेदारी 200 से अधिक वर्षों से लोगों को महाद्वीपों में यात्रा करने में मदद कर रही है, जिससे ट्रेनें दुनिया भर में भारी सामान और यात्रियों को ले जाने के सबसे कुशल और सुरक्षित तरीकों में से एक बन गई हैं।

वीडियो प्रतिलिपि

परिचय

ट्रेनें अद्भुत मशीनें होती हैं जो लोगों या सामान से भरे कई डिब्बों को खींच सकती हैं! वे तेज़ी से चलती हैं, लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि ट्रेनों में स्टीयरिंग व्हील नहीं होते हैं? तो वे पटरियों पर कैसे टिकी रहती हैं, खासकर जब पटरियाँ मुड़ती हैं? यह सब ट्रेन के पहियों और पटरियों के डिज़ाइन की वजह से है, जो एक शानदार टीम की तरह मिलकर काम करते हैं!

मुख्य तथ्य

क्या आप जानते हैं कि ट्रेन के पहिये पूरी तरह से सपाट नहीं होते हैं, बल्कि वे वास्तव में थोड़े शंकु के आकार (कोनिकल) के होते हैं? यह शंकु जैसा आकार ही ट्रेन को मोड़ पर खुद को मोड़ने में मदद करता है! क्या आप यह भी जानते हैं कि हर पहिये के अंदरूनी किनारे पर 'फ्लैंज' (Flange) नामक एक उठा हुआ किनारा होता है, जो पहिये को पटरी से फिसलने से रोकने के लिए एक सुरक्षा दीवार के रूप में काम करता है?

सोचिए

ट्रेन के पहिये का शंकु जैसा आकार उसे घुमावदार पटरी पर मोड़ने में कैसे मदद करता है?

उत्तर

जब ट्रेन किसी मोड़ पर जाती है, तो पहियों के शंकु जैसे आकार के कारण, बाहरी पटरी पर लगा पहिया थोड़े बड़े व्यास पर घूमता है, और अंदरूनी पटरी पर लगा पहिया थोड़े छोटे व्यास पर घूमता है। लुढ़कने की परिधि में इस अंतर के कारण पहिये स्वाभाविक रूप से ट्रेन को मोड़ की ओर 'मोड़' देते हैं, जिससे वह बिना स्टीयरिंग व्हील के पटरी पर बिल्कुल सही ढंग से बनी रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रेनों में स्टीयरिंग व्हील क्यों नहीं होते हैं?

ट्रेनों को स्टीयरिंग व्हील की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि उनके पहिये विशेष रूप से पटरियों का स्वचालित रूप से अनुसरण करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। पहियों का शंकु जैसा आकार उन्हें मुड़ते समय पटरियों पर अपनी स्थिति समायोजित करने देता है, जिससे चालक के किसी भी हस्तक्षेप के बिना मोड़ने का काम हो जाता है।

अगर ट्रेन का पहिया शंकु के बजाय सपाट होता तो क्या होता?

यदि ट्रेन के पहिये पूरी तरह से सपाट होते, तो उन्हें कोनों पर मुड़ने में मुश्किल होती और वे संभवतः पटरियों से रगड़ खाते, जिससे बहुत अधिक शोर और टूट-फूट होती। शंकु का आकार आवश्यक है क्योंकि यह मुड़ने के दौरान दोनों तरफ के पहियों को अलग-अलग दूरी तय करने की अनुमति देता है, जिससे ट्रेन फिसलने या पटरी से उतरने से बचती है।

ट्रेन के पहिये और पटरियाँ किस चीज़ से बनी होती हैं?

ट्रेन के पहिये और जिन पटरियों पर वे चलते हैं, दोनों आमतौर पर उच्च शक्ति वाले स्टील से बने होते हैं। यह 'स्टील-ऑन-स्टील' संपर्क बहुत कम घर्षण पैदा करता है, इसीलिए एक ट्रेन बिना ज़्यादा ऊर्जा खर्च किए दर्जनों भारी डिब्बों को खींच सकती है।

ट्रेनें एक पटरी से दूसरी पटरी पर कैसे जाती हैं?

ट्रेनें दिशा बदलने के लिए 'स्विच' (Switch) या 'पॉइंट्स' (Points) नामक एक विशेष प्रकार की पटरी का उपयोग करती हैं। ये रेल के चलने योग्य हिस्से होते हैं जिन्हें बाईं या दाईं ओर खिसकाया जा सकता है ताकि ट्रेन के पहियों को दूसरे रास्ते पर निर्देशित किया जा सके, जिससे ट्रेन सुरक्षित रूप से नई लाइन पर जा सके।

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